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साली हो तो काली हो

Posted On: 17 Dec, 2014 कविता में

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साली हो तो काली हो,

थोडी नखरेवाली हो,

समझे सब कुछ बिन बात कहि,

अखिंयाँ जिसकी ज्यों झील तलि,

शब्दों में जिसकी गाली हो,

साली हो तो काली हो।

उसकी मुस्कराहट

दिल की आहट

उसकी उदासी

पकवान भी बाँसी

करती अपनी मनमानी हो,

साली हो तो काली हो।

मुस्काए तो बनि फूल कलि,

चहचाए तो फिर फूल झरि,

कानो मे पहनें बाली हो,

साली हो तो काली हो।

पायल की झनकार,

छुए दिल के तार,

माँगू हर बार

साली का प्यार,

सखियाँ भी जिसकी खाली हो,

साली हो तो काली हो।

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