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“जिन्दगी कैसी है पहेली हाय कभी तो हसाए कभी ये रुलाए।“

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“जिन्दगी कैसी है पहेली हाय कभी तो हसाए कभी ये रुलाए।“

मेरा उद्देश्य इस गीत का प्रचार करने का नहीं बल्कि आपका मन हल्का करने का हैं। ताकि आप लोग स्वतन्त्र दिमाग से मेरे विचार पढ सके और अपने विचार रख सके।

“पुस्तके अच्छी मित्र होती है और एक अच्छा मित्र एक पूरा पुस्तकालय।“ एक वक्त था जब पुस्तको को ना केवल पढा जाता था बल्कि उनसे ज्ञान भी लिया जाता था। आज पुस्तक की वही जगह कम्पयुटर ने ले ली है। जहाँ पुरानी फिल्मों में मित्रता के सुन्दर पल और ख़ट्टे-मीठे किस्से होते थे। वहीं आज चैटिंग ने अपनी छाप छोड दी है। पुराने ग्रन्थों में भी मित्रता के कई प्रमाण मिलते है।

भारतीय समाज में मित्रता का अर्थ पुरुष की पुरुष से मित्रता और लडकी की लडकी से ही मित्रता को श्रेष्ठ माना जाता था। वहीं आज जब पुरुष को पुरुष के साथ अगर देखा जाता हैं तो उसे गे कहा जाता है। मजाक तक तो ठीक है पर जब एक ही बात बार सामने आती है तो एक चिढ बन जाती है। वहीं दूसरी और पुरुष और स्त्री की मित्रता को जहाँ अपवाद माना जाता था। आज उसे एक सम्मान माना जाता है।

स्त्री और पुरुष की मित्रता को सम्मान मिलना तो एक अच्छी बात है। पर दो पुरुषों की मित्रता को गे शब्द से सम्मानित करना क्या ठीक है?

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4 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Sushma Gupta के द्वारा
November 26, 2012

योगेश जी, आपकी बात निश्चित ही विचारनीय है,कि बर्तमान में रिश्तों के सही-रूप को दर्शाया जाये ….साधन्यबाद …

yogeshdattjoshi के द्वारा
March 30, 2012

मजाक करना अच्छी बात है पर अगर इससे किसी को ठेस पहुंचे तो गलत है. नौवी कक्षा में एक कहानी थी महादेवी वर्मा की “सोने का हिरन”. उसमे उन्होंने एक बात कही थी “कितना अच्छा होता अगर इन्सान भी आँखों से बात करता और समझता.” कमान से निकला हुआ तीर और जबान से निकली हुई बात कभी वापस नहीं आती इसलिए इनका इस्तेमाल सोच समझकर करना चाहिए

sinsera के द्वारा
March 29, 2012

योगेश जी नमस्कार, कई दिनों के बाद आज आप के ब्लॉग का कमेन्ट बॉक्स खुल पाया है. कुछ नेटवर्क की खराबी थी शायद. आप ने सभी रचनायें अच्छी लिखी हैं… दोस्ती चाहे लड़के की लड़के से हो या लड़की से, दरअसल मर्यादा की सीमा में होनी चाहिए. यही बात जब आज के युवा भूलने लगते हैं तो “गे ” या “लूज़ कैरेक्टर ” की उपाधि से नवाज़े जाते हैं .अगर दोस्ती मर्यादा में हो तो एक बहुत ही प्यारा रिश्ता होती है… इसी विषय पर मेरा एक आर्टिकिल है, लिंक दे रही हूँ समय हो तो पढ़िए गा… http://sinsera.jagranjunction.com/2012/02/14/%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%B0-%E0%A4%87%E0%A4%A8%E0%A5%8D%E0%A4%B8%E0%A4%BE%E0%A4%A8-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%9C%E0%A4%BC%E0%A4%B0%E0%A5%82%E0%A4%B0%E0%A4%A4-%E0%A4%B9%E0%A5%88/

    yogeshdattjoshi के द्वारा
    March 29, 2012

    सरिता जी नमस्कार मजाक करना अच्छी बात है पर अगर इससे किसी को ठेस पहुंचे तो गलत है. नौवी कक्षा में एक कहानी थी महादेवी वर्मा की “सोने का हिरन”. उसमे उन्होंने एक बात कही थी “कितना अच्छा होता अगर इन्सान भी आँखों से बात करता और समझता.” कमान से निकला हुआ तीर और जबान से निकली हुई बात कभी वापस नहीं आती इसलिए इनका इस्तेमाल सोच समझकर करना चाहिए. प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद. नमस्कार.


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